परंपरा का सम्मान
मानवता की सेवा
" संत श्री रणधीर जी बाबल के कालातीत ज्ञान में निहित, हम जरूरतमंदों के लिए आशा के पुल बनाते हैं।"
पुर साथरी का इतिहास
गुरु जाम्भोजी एवं संत रणधीर जी का जीवंत चमत्कार
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मालवे से भ्रमण करते हुये अपनी जमात के साथ शिष्य रणधीर जी के सहित सबसे पहले पुर गाँव (भीलवाड़ा) में पधारे। गुरु महाराज पुर में घाटम जी थापण के यहाँ पर ठहरे और पाँच दिन तक लगातार यज्ञ किया। उस स्थान पर उन्हीं के समय में साथरी का निर्माण किया गया जो आज भी विद्यमान है।
गुरु महाराज की सोलह साथरियों में पुर की साथरी छठे नम्बर की है।
यहाँ रणधीर जी ने एक दिन दातुन करके बेर की टहनी को कीचड़ में फेक दिया, जो रात भर में अंकुरित हो गया। वर्षों बाद, जब एक वंशज को इसके काँटे से पीड़ा हुई और उसने छाया हेतु बड़ की इच्छा प्रकट की, तो प्रभु का चमत्कार हुआ: उसी रात उस बेर के स्थान पर बड़ का पौधा भी प्रस्फुटित हुआ। आज भी वे दोनों पेड़ एक साथ लगे हुए हैं।
बड़ होता तो दर्शन करते, काँटे पीड़ कबहूँ नहीं मरते।
उस कही सोझे तिस ही राता, गई बेर, बड़ भयो प्रभाता।।
स्वामी भगवान प्रकाश
महन्त समेलिया धाम
खेजड़ली का खडाणा
"भादो सुदी दसवीं वि.स. 1787: अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोई वीरों ने खेजड़ी वृक्षों की रक्षार्थ अपने प्राणों का बलिदान दिया। इसमें बाबल परिवार के 26 सदस्यों ने भी अपनी आहुति दी।"
शहीदों की नामावली
कुल 26 शहीद (22 पुरुष, 4 स्त्रियाँ)
अमर शहीद सदैव स्मरणीय
बाबल (बिश्नोई) वंशावली - विस्तृत विवरण
खेमराज जी बाबल
बाबलसरबाबल वंश के मूल पुरुष
रणधीर जी बाबल
पड़ियालविष्णोई पंथ में दीक्षित, मुकाम मंदिर के प्रथम महंत। वि.सं. 1542 में पड़ियाल गांव बसाया।
हापूजी
हापूजी का निधन कार्तिक बदी तीज संवत् 1612 को हुआ।
मांडूजी
मांडू जी का स्वर्गवास कार्तिक सुदी सातम संवत् 1662 को हुआ। माँडूजी की पत्नी अंतिया अपने बेटे नाथोजी के पीछे संवत् 1608 भादवा सुदी आठम सोमवार शाम 6 बजे सती हुई, जो आज 'महासती' के नाम से प्रसिद्ध हैं। भादवा सुदी आठम को इनकी धोक लगती है।
लादूजी
मांडूजी के बेटे। इनका निवास पड़ियाल में रहा।
लालो जी
फिटकासनी (जोधपुर)लालोजी ने फिटकासनी गांव वि.सं. 1617 जेठ सुदी पंचम को बसाया था। लालोजी का स्वर्गवास जेठ सुदी तीज वि.सं. 1677 में हुआ।
रत्नोजी
रत्नोजी के पुत्र जैमल जी ने धर्म कार्यों में अपने प्राण दिए थे, वे फिटकासनी गांव में शहीद हुए थे। बाबलों में इनकी बहुत अधिक मान्यता है। आगे चलकर जयो जी, जोधा जी, आसो जी, जगमाल जी ने की वंशावली चली।
वर्तमान पीढ़ी
अभी रणधीर जी बाबल वंश की 16वीं/17वीं पीढ़ियां चल रही है जो समाज और पर्यावरण की सेवा में संलग्न हैं।
"जो अपने सपनों को पूरा करने का साहस करता है, वह हर मुश्किल को पार कर सकता है।"
हमारा नेतृत्व

"हमारा मिशन मानवता की सेवा उसी भक्ति के साथ करना है जो संत रणधीर जी की प्रकृति के लिए थी।"
अध्यक्ष श्री रमेश बाबल
अध्यक्ष, संत श्री रणधीर जी बाबल सेवा संस्थान

"संस्थान के माध्यम से समाज में शिक्षा और संस्कारों का बीजारोपण करना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है।"
जयकिशन बिश्नोई
महासचिव, संत श्री रणधीर जी बाबल सेवा संस्थान (बासनी निकुबा)
संस्था के उद्देश्य
समिति का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राजस्थान राज्य की राजस्व सीमा तक है। हमारे मुख्य उद्देश्य निम्न हैं:
श्री जम्भेश्वर भगवान के दर्शन एवं शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करना।
श्री जम्भेश्वर भगवान् के परम शिष्य श्री रणधीरजी बाबल की विचारधारा एवं शिक्षा से सम्बन्धित समस्त कार्य करना।
श्री रणधीरजी बाबल के नाम से मेला प्रारम्भ एवं संचालन करना।
बाबल गौत्र के इतिहास एवं वंशावली को संग्रहित एवं प्रकाशित करना।
पर्यावरण एवं पारिस्थितिक संरक्षण का कार्य करना।
समाज में व्याप्त कुरीतियों का उन्मूलन करना।
बालक, बालिकाओं, महिलाओं एवं प्रौढ़जन के शिक्षा एवं विकास सम्बन्धि कार्य करना।
गरीब एवं आर्थिक तथा सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों के उत्थान एवं विकास का कार्य करना।
विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय को प्रारम्भ एवं उनका संचालन करना।
छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास, वाचनालय प्रारम्भ करना एवं उनका संचालन करना।
शिक्षा, स्वास्थय, चिकित्सा, खेती के विकास से सम्बन्धित कार्य करना।
विश्नोई पंथ के साहित्य एवं विकास हेतु समस्त कार्य करना।
जनहित से सम्बधित अन्य कार्य करना।
groupsकार्यकारिणी का गठन
संस्थान के कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक प्रबंध कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा जिसमें कुल 31 पदाधिकारी एवं सदस्य होंगे:
- अध्यक्ष(1)
- उपाध्यक्ष(4)
- महासचिव(1)
- सचिव(4)
- कोषाध्यक्ष(1)
- सह-कोषाध्यक्ष(1)
- प्रवक्ता(1)
- संगठन सचिव(2)
- कार्यकारिणी सदस्य(16)
verified_userसदस्यता एवं नियम
पात्रता / Eligibility
योग्यता: सदस्य बालिग होना चाहिए, पूर्ण शाकाहारी, वन्य जीवों का शिकार न करने वाला एवं श्री जम्भेश्वर भगवान के सिद्धांतों में अटूट विश्वास रखने वाला होना चाहिए।
सदस्यता शुल्क / Membership Fee
नोट: सदस्यता निष्कासन, साधारण सभा, और बैठकों के नियम 'संस्थान विधान नियमावली' के अनुसार संचालित होंगे।
आगामी योजनाएं
“रणधीर जी बाबल” लाइब्रेरी निर्माण
बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सभी गांवों में आधुनिक लाइब्रेरी।
रणधीर जी पार्क एवं प्याऊ
पर्यावरण संरक्षण हेतु पार्क का विकास एवं राहगीरों के लिए प्याऊ निर्माण।
ऐतिहासिक पुस्तक प्रकाशन
रणधीर जी बाबल व बाबल इतिहास पर विस्तृत पुस्तक का प्रकाशन।
रणधीर जी की छतरी निर्माण
मुकाम मंदिर पर भव्य छतरी का निर्माण - सामूहिक एकता एवं प्रयास की आवश्यकता।
रणधीर जी बाबल व खंगार बा पुरस्कार
समाज के प्रति उत्कृष्ट सेवा हेतु पुरस्कारों का शुभारंभ।
खेजड़ली मंदिर पुनः निर्माण एवं जीर्णोद्धार
शहीदों की पावन स्मृति में खेजड़ली मंदिर का भव्य पुनः निर्माण एवं परिसर का नवीनीकरण।
हमे प्रयास करने से डरना नहीं चाहिए। ज़्यादा से ज़्यादा हम असफल होगे और असफल तो वो हम अभी भी बिना प्रयास के हैं। इसलिए कोशिश अवश्य करनी चाहिए।
आपका सहयोग, उज्ज्वल भविष्य
कोशिश न करना पहले से ही असफलता को स्वीकार करने जैसा है, जबकि प्रयास करने से जीतने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
